बनाया बंधक- बिजली कर्मचारियों से किसने कहा: "चाय-नाश्ता देंगे, खाना भी देंगे, पर जाने नहीं देंगे"
देवनन्दन श्रीवास्तव
लखीमपुर खीरी। भीषण गर्मी के दिनों में बिजली कर्मचारियों के साथ मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। लेकिन बुधवार की रात लखीमपुर में बिजली कर्मचारियों के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। शहर के एक मोहल्ले में कर्मचारियों को बंधक तो बना लिया गया, पर मजे की बात यह रही कि स्थानीय लोगों ने उन्हें सम्मानपूर्वक बैठाया और कहा— "हम आपको चाय-नाश्ता भी देंगे, खाना भी देंगे, पर जब तक लाइट सही नहीं होगी, जाने नहीं देंगे।"
दरअसल, पूरा मामला लखीमपुर शहर के मोहल्ला बुद्ध विहार कॉलोनी और शिव कॉलोनी से जुड़ा हुआ है। भीषण गर्मी के चलते इन दिनों पूरे शहर की बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है। इसी बीच साउथ पावर हाउस से चलने वाला 'फीडर नंबर 1' भी लोगों के लिए आफत बन गया।
एक तरफ साउथ नहर डाक बंगले के पास रखा ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण बुधवार शाम करीब 4:00 बजे से एक बड़ी आबादी के घरों की बिजली गुल थी; वहीं दूसरी तरफ बुद्ध विहार कॉलोनी के ट्रांसफार्मर का जंपर बार-बार उड़ रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ऐसा 10 से भी ज्यादा बार हुआ, जिससे पूरा मोहल्ला परेशान हो गया।
उधर, सिंचाई विभाग डाक बंगले (शिव कॉलोनी) के पास लगा ट्रांसफार्मर सही करने की कोशिश में जुटे कर्मचारियों के पास रात करीब 8:00 बजे कुछ महिलाएं पहुंचीं और उन्हें अपने साथ ले गईं। इसके बाद बुद्ध विहार कॉलोनी की बिजली दुरुस्त की गई। कर्मचारी जैसे ही पुनः ट्रांसफार्मर ठीक करने पहुंचे, तभी तारों में फिर से आग लग गई और सप्लाई फिर बाधित हो गई।
इस पर लोगों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। हालांकि, नागरिकों ने कानून हाथ में न लेते हुए संयम दिखाया। उन्होंने कर्मचारियों को वहीं रोक लिया और कहा— "जब तक लाइन सही नहीं हो जाती, कोई कहीं नहीं जाएगा। अपने वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाइए।"
इसी दौरान सूचना पाकर '112/100 नंबर' की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। तब मोहल्लेवासियों ने पुलिस से हाथ जोड़कर कहा— "आप लोग जाइए, हम इन्हें चाय-नाश्ता भी देंगे और खाना भी देंगे, पर जब तक लाइट नहीं आती, तब तक जाने नहीं देंगे।" यह सुनकर पुलिस टीम भी वहां से लौट गई।
कुछ समय बाद विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और रात में ही लाइन ठीक कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर कर्मचारियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, लोगों का कहना है कि बिजली पूरी रात नहीं आई और नहर कॉलोनी डाक बंगले के पास का ट्रांसफार्मर सही होने में भी सुबह के 3 बज गए।
घटना के दौरान एसडीओ (SDO) सदर और अधिशासी अभियंता (EE) की सक्रिय भूमिका भी देखने को मिली। हर बार कॉल करने पर अधिकारियों द्वारा फोन उठाया जा रहा था, लोगों को स्थिति की जानकारी दी जा रही थी और बिजली व्यवस्था सामान्य करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसकी स्थानीय निवासियों ने सराहना भी की।
क्या है बिजली विभाग की बड़ी समस्या?
बिजली विभाग के कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे में किसी भी फॉल्ट को तुरंत सही कर पाना संभव नहीं हो पाता। कई बार उच्च अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो रहा। कर्मचारियों का टोटा ही देरी का मुख्य कारण है।
ठेकेदार की मनमानी भी बनी आफत
एसडीओ सदर से हुई बातचीत में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। उन्होंने बताया कि जिस ठेकेदार को ट्रांसफार्मर सही करने और मौके पर 'मोबाइल ट्रांसफार्मर' पहुंचाने का टेंडर दिया गया है, वह फोन तक नहीं उठाता।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे लापरवाह ठेकेदार को टेंडर दिया ही क्यों गया? और यदि वह लगातार ऐसी मनमानी कर रहा है, तो उसका टेंडर निरस्त क्यों नहीं किया जा रहा? एक ठेकेदार की लापरवाही की सजा शहर की एक बड़ी आबादी आखिर क्यों भुगते? सवाल तमाम हैं, लेकिन जिम्मेदार खामोश हैं।
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