हरियाली पर ऐसा संकट, आने वाले समय में हम सब जिएंगे कैसे

हरियाली पर ऐसा संकट, आने वाले समय में हम सब जिएंगे कैसे


कमलेश जायसवाल लखीमपुर -खीरी
खमरिया/धौरहरा-खीरी। जिले की चर्चित उत्तर खीरी धौरहरा रेंज में बीते वर्ष जहां जोरशोर से पर्यावरण बचाओ अभियान के तहत भारी संख्या में पेड़ लगाकर वन विभाग सहित अन्य पर्यावरण प्रेमी सुर्खियों में बने रहे वहीं वन विभाग के रहमोकरम से क्षेत्र में पान की दुकानों की तरह उपजे फर्नीचर व्यवसायी प्रतिदिन प्रतिबन्धित हरे भरे नीम,गूलर,शीशम,आम,सागौन,सहित अन्य पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर अपने व्यवसाय को चमकाने के लिए अंधाधुंध कटान करते रहे। इस बीच अगर इनकी किसी ने वन महकमें से शिकायत भी कर दी तो पहले से ही तैयार विभागीय अधिकारी जुर्माना काटकर कागजी खानापूर्ति कर पर्यावरण बचाओ अभियान को पलीता लगाते रहे। जिसके चलते क्षेत्र में आम की बागों का तो लगभग नामोनिशान मिट ही गया वहीं नीम, गूलर, शीशम,सागौन का भी सफाया लगातार जारी है।
धौरहरा क्षेत्र में अंधाधुंध हरे भरे प्रतिबन्धित पेड़ों के कटान से मानव जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। जिसके चलते बदले पर्यावरण के चलते सर्दी में पारा 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे होता जा रहा है। वहीं गर्मियों में 40 डिग्री के पार होकर आग उगलती जमीन और सिर पर सूर्यदेव की तपिश से बचने के लिए पेड़ों की छाया ढूंढी जाती है। लेकिन यही आलम रहा तो छाया दूर तक नसीब नहीं होगी। हरे-भरे वृक्ष ,माफियाओं की जकड़न में हैं। पेड़ मरते जा रहे हैं और वन विभाग इस विनाश को होते देख रहा है। वह दिन दूर नहीं जब क्षेत्र में दूर तक पेड़ नहीं दिखेंगे। होंगी तो बस कंक्रीट कंस्ट्रक्शन और तपती सड़कें और खुला आसमान। विभाग की मिलीभगत से तमाम हरे भरे पेड़ों की हरियाली उड़ती जा रही है। वहीं क्षेत्र में हजारों बीघा जंगल पर माफियाओं ने कब्जा जमा लगातार पेड़ों को काटने में व्यस्त है। लेकिन ग़ुलाबी नोटों की चकाचौंध के आगे इन पर रोक लगाने के लिए कोई भी रुचि नहीं ले रहा है।
धौरहरा क्षेत्र में सालो साल सैकड़ों बीघा हरे-भरे आम के बाग, सड़क किनारे ,खेतों में लगे प्रतिबन्धित पेड़-पौधौं तक को खुलेआम काटा जा रहा है। जबकि, हर साल लगाए जाने वाले पौधे देख रेख के अभाव में दम तोड़ जाते हैं।सड़कों,गांवों एवं कस्बों के इर्द-गिर्द हरे-भरे पेड़ों को काटकर प्लाटिंग कर दी गई है। जिस कारण फिजा और पर्यावरण में जहर घुलता जा रहा है। ऐसे में जहां प्राणवायु यानी ऑक्सीजन की कमी होने लगी है, वहीं मौसम का चक्र भी पूरी तरह बिगड़ गया है। वायुमंडल में कार्बनडाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है। सांस लेना भी दुभर होता जा रहा है। बिगड़ते वायुमंडल के चलते सांस, संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां पैदा हो रही हैं। ऐसे में वृक्षों को सहेजने की जगह उन पर लगातार कुल्हड़िया चलाई जा रही है। इससे प्राणवायु का स्तर ओर भी गभीर हो रहा है वहीं पर्यावरण बचाने की मुहिम को भी तगड़ा झटका लगा है। पेड़ों की लगातार कटाई होने की वजह से दिन प्रतिदिन वन क्षेत्र घटता जा रहा है। यह पर्यावरण की दृष्टि से बेहद चिंतनीय है। जीवन के लिए घातक है। विभिगीय अधिकरियों की मिलीभगत से पेड़ों को काटाकर वृक्षों के संरक्षण के लिए बने नियम और कानूनों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे प्राकृतिक संरचना बिगड़ रही है। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक साबित हो रहा है।

साल भर लगते रहे करोड़ों के पौधे, देखरेख पर ध्यान नहीं

बरसाती मौसम में क्षेत्र भर में हर वर्ष करोड़ों रुपये की लागत से पौधरोपण किया जाता है। वन जंगल, सड़क, हाईवे और गांवों के किनारे कई क्षेत्रों में पौधरोपण किया जाता है। नेतागण, प्रशासनिक अफसर और वन विभाग के अधिकारी पौधरोपण के दौरान फोटो खिंचवाने तक सीमित रहते हैं, लेकिन इन पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी के नाम पर वन विभाग के अधिकारी आंखें बंद कर बैठक जाते हैं। सभी पेड़ देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं। जबकि पौधों की देखरेख के लिए भी लाखों का वजट वन विभाग को मिलता है। जिसकी वजह से हर साल लगने वाले पौधे चंद दिनों में घुट-घुट कर मर जाते हैं।

*बीते वर्ष भी कागजों तक सिमटी रही पर्यावरण जागरूकता*

बीते वर्ष में भी जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए जागरूकता अभियान या अन्य कार्यक्रम चलाए जाते रहे। लेकिन, अधिकांश कार्यक्रम केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गये। जागरूकता जमीन पर नहीं उतर पायी। यही कारण है कि पेड़ों का कटान रोकना तो दूर पौधरोपण भी खास मौकों पर किया जाता है। उसके बाद चंद पौधों को छोड़ बाकी लगने के चंद दिनों बाद ही सुख जाते है।

धौरहरा क्षेत्र में बगैर लाइसेंस फर्नीचर की दुकानें पेड़ों के दोहन में बनी साझेदार

धौरहरा क्षेत्र के रमियाबेहड़, कफारा, धौरहरा, ग्रांट, सिसैया, ऊंचागांव, अदलिशपुर, रेहुआ, सरसवा, गुदारिहा, कटौली, ईसानगर, खमरिया, लाखुन, गैसापुर, समरदा सहित अन्य दर्जनों स्थानों पर बगैर लाइसेंस संचालित सैकड़ों फर्नीचर की दुकानें व उनके संचालनकर्ता वन विभाग से मिलीभगत करके प्रतिबन्धित पेड़ों का कटान करवाकर जहां अपना धंधा चमका रहे है। वहीँ पड़ोसी जनपद सीतापुर के रास्ते नीम, गूलर, शीशम, सागौन, सेमल के पेड़ों का चिरान करवाकर अन्य प्रदेशों तक लकड़ी भेजने का काम कर रहे है। जिसमें जिले पर बैठे कुछ वन व उद्यान विभाग के जिम्मेदार निकासी लेटर जारी कर इनका भरपूर सहयोग करते रहे।

2019 में वन विभाग रहा मस्त, लकड़ी माफिया व्यस्त, आमजनमानस त्रस्त

धौरहरा क्षेत्र में पर्यावरण बचाओ अभियान को ताक पर रखकर 2019 में पूरा वर्ष हरे भरे प्रतिबन्धित पेड़ों पर आरा व कुल्हाड़ी चलती रही। जिससे वन विभाग के अधिकारी पेड़ों के कटान से मिलने वाली हरियाली में मस्त रहे। वहीं लकड़ी माफिया नीम,गूलर,आम,सागौन,शीशम के पेड़ों का सफ़ाया करने में व्यस्त रहा। जिसके चलते क्षेत्र में हो रहे अंधाधुंध पेड़ों के कटान से बदले पर्यावरण से आमजनमानस सर्दी व गर्मी के साथ साथ क्षेत्र में प्रदूषित हुए पानी से तरह तरह की जानलेवा बीमारियों से त्रस्त हो रहा है।

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