इस योजना पर लगा क्षेत्रीय राजनीति का ग्रहण, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ

इस योजना पर लगा क्षेत्रीय राजनीति का ग्रहण, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ



कमलेश जायसवाल
खमरिया/लखीमपुर-खीरी। भले ही देश के प्रधानमंत्री ने पूरे देश को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित कर दिए हो पर धौरहरा तहसील में 2019 में दर्जनों गांवों में गवई राजनीति इस कदर हावी हुई कि जरूरतमंदों को शौचालय बनवाने का मौका देना मुनासिब नहीं समझा गया। जिसमें सरकारी मुलाजिमों की लापरवाही व कामचोरी सरकार के खुले में शौच मुक्त अभियान का वेडा गर्क कर स्वच्छ भारत मिशन को केवल कागज़ों पर सिमटा दिया।
धौरहरा तहसील के ब्लॉक रमियाबेहड़, धौरहरा व ईसानगर में स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त होने का कार्यक्रम गवई राजनीति के चलते पूरा वर्ष केवल कागजों पर ही चलता रहा। भले ही देश के प्रधानमंत्री पूरे देश को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिए हो पर ब्लॉक ईसानगर,धौरहरा व रमियाबेहड़ में गवई राजनीति के हावी होने का फ़ायदा उठाकर दर्जनों प्रधान व सैक्रेटरी मिलकर गांवों को नहीं बल्कि अपने घरों को ही खुले में शौच मुक्त करते हुए देखे गये। ईसानगर,रमियाबेहड़ व धौरहरा की दर्जनों ग्राम पंचायतों के ग्रामीण इसकी बानगी है। इस बाबत तीनों ब्लॉकों के दर्जनों ग्राम पंचायतों के जरूरतमंद ब्लॉक पर पहुँचकर ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी व पंचायत मित्र पर पूरे वर्ष सवालिया निशान लगा गवई राजनीति का शिकार होने की बात कहते हुये खंड विकास अधिकारी से खुले में शौच से बचने के लिए शौचालय बनवाने की मांग करते रहे हैं परन्तु नतीज़ा जस का तस ही रहा। जिसको देख ब्लॉक पर मौजूद अधिकारी शुरूआती दौर में सकते में आये पर कुछ दिनों बाद पुनः चुप्पी साध गये। वहीं अपनी फ़ज़ीहत न हो इसके लिए 2019 में ब्लॉकों पर पहुँचें सैकड़ों फरियादियों को जल्द ही शौचालय बनवाने के अस्वासन की घुट्टी पिलाकर बिदा करने का सिलसिला पूरे वर्ष चलता रहा। यही नहीं इस मामले में जानकारी करने पर अन्य गांवों के ग्रामीणों ने अपना दुखड़ा रोते हुए बताया कि जो हाल ईसानगर ब्लॉक का है वैसा ही हाल रमियाबेहड़ व धौरहरा की दर्जनों ग्राम पंचायतों में है जहां ग्राम प्रधान,पंचायत मित्र, ग्राम विकास अधिकारी की तिकड़ी ने मिलकर केवल कागजों पर गांवों को खुले में शौच मुक्त कर दिया है। वहीं गवई राजनीति का शिकार हुए जरूरतमंदों के सूचियों में नाम आने के बाद भी शौचालय बनवाने के लिए दी जा रही सरकारी मदद से वंचित कर दिया गया। जिससे वह शौचालय बनाने का केवल सपना ही देखते रह गये। यहीं नहीं कुछ ग्राम पंचायतों में ये भी देखने को मिला कि ग्राम प्रधान व पंचायत मित्रों ने अपने ही घर के सभी सदस्यों के नाम सूची में शामिल कर शौचालय की रकम निकाल कर स्वयं को शौच मुक्त बना लिया। जिसमें ग्राम विकास अधिकारियों ने इनका भरपूर सहयोग किया।फ़िलहाल कुछ भी हो इतना सब होने के बाद भी ब्लॉको पर तैनात अधिकारियों की चुप्पी से यही प्रतीक होता है कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाये गये स्वच्छ भारत मिशन योजना (खुले में शौच मुक्त अभियान) को किस तरह पलीता लगाकर कागज़ों तक सीमित करके अपना पल्ला झाड़ कर बहती गंगा में डुबकी लगाई गई है। यह ईसानगर, धौरहरा, रमियाबेहड़ ब्लॉक से बेहतर औऱ कहीं नहीं जाना जा सकता है। इन सब बातों से यही लग रहा है कि तहसील धौरहरा क्षेत्र के अधिकतर गांवों में खुले में शौच मुक्त अभियान की उच्च स्तरीय जांच हो जाये तो दर्जनों सफ़ेदपोशों के चेहरे से नक़ाब उठने में देर नहीं लगेगी।

किसी ने खरीदा मोबाइल तो किसी ने खरीदी एलईडी

तहसील क्षेत्र की अधिकतर ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों ने अपने चेहते लोगों को स्वच्छ भारत मिशन योजना शुरू होते ही शौचलय बनवाने के नाम पर ताबड़तोड़ 6000-6000 की दो किस्तों में चेकें काटकर वाहवाही लूटते रहे। वहीं प्रधानो के इन नुमाइंदों ने शौचलय न बनवाकर पूरे 12000 रुपये निकालकर कहीं घूमने का लुप्त उठाया तो किसी ने मोबाइल तो किसी ने एलईडी खरीदकर अपने शौक पूरे किए। वहीं जो शौचालय बनवाने के लिए राह ताक रहे थे वे गवई राजनीति का शिकार होकर ब्लॉकों पर तैनात जिम्मेदारों के चक्कर पूरे वर्ष लगाते रहे उसके बावजूद भी उनको शौचलय बनवाने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता नसीब नहीं हुई। जिसके चलते दर्जनों ग्राम पंचायतों में आज भी लोगों को खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ रहा है।

दूसरी क़िस्त न मिलने से आज भी अधूरे पड़े शौचलय

तहसील क्षेत्र की कुछ ग्राम पंचायतों में कुछ जरूरतमंदों को शौचालय बनवाने के लिए पहली किस्त 6000 रुपये की मिल गयी पर दूसरी न मिलने की वजह से शौचालय अधूरे ही रह गए। जिसकी वजह से अधूरे पड़े शौचालय में शुचि की जगह उसमें लकड़ी आदि समान रखने का काम किया जा रहा है। लोगों की मानेंं तो गांवों में कुछ जांच अधिकारी भी गये जिनको ग़ुलाबी नोटों की चकाचौंध में यह सब दिखाई ही नहीं पड़ा।


गांवों में शौचालय बनवाने से वंचित, कर रहे चुनाव का इंतज़ार


तहसील क्षेत्र की जिन ग्राम पंचायतों में भारी संख्या में लोग 2019 में शौचालय बनवाने से वंचित रह गये वह अब आगामी पंचायत चुनाव की राह ताक रहे है। दर्जनों ग्राम पंचायतों में जब इस बाबत लोगों से बात की गई तो ग्रामीणों ने बताया कि मौजूदा ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉकों पर बैठे जिम्मेदारों के चक्कर लगाने के बाद भी जब हम लोगों की तरफ ध्यान न देकर सरकारी योजना देने से वंचित कर दिया गया। तो हम लोग शिकायतें व चक्कर लगाना बन्द करके आगामी ग्राम पंचायत चुनाव में जीत को हार में बदलवाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। जिसके बाद नए प्रधान आयेगे तब हम लोगों को बगैर अधिकारियों के चक्कर लगाए ही सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़ेगा। वही तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लॉकों में करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में जब लोगों से अलग अलग पूछा गया कि शौचालय तो पर्याप्त संख्या में हर एक गांव में जारी होकर लगभग बन भी गये है तो लोग नाराज़गी व्यक्त करते हुए बताने लगे कि शौचालय गांवों में बने है या कागजों पर अगर इसकी घर-घर जाकर जांच हो जाये तो इसमें कितना बड़ा घोटाला हुआ है उसको देख पूरा प्रदेश ही हिल जायेगा।

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