डॉ. ओमकार सक्सेना डीएनएस न्यूज़ नेटवर्क
जंगबहादुरगंज खीरी, उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के चुनावों का दौर 7 मार्च को 7 वें राउंड के साथ पूर्ण होते ही शाम को एग्जिट पोल समाचार चैनलों पर आना ही था,जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार था। परंतु जंगबहादुरगंज में 23 फरवरी को चौथे राउंड का चुनाव खत्म होते ही स्थानीय लोग तिराहों - चौराहों पर जनता जनार्दन के द्वारा रोज़ किसी न किसी की सरकार बनाने और अपने अपने विधायक को जिताने का सिलसिला 24 फरवरी से शुरू हो चुका था तिराहों, चौराहों व चौपालों पर वहीं के लोकल लोगों के द्वारा ही रोज सरकारें बनायी व गिराई जातीं थीं, विधायकों को जिताया हराया जाता था उसीके साथ विधानसभा क्षेत्र में सीटें हराई व जितायी जाती थीं। परन्तु कल 7 मार्च को एग्जिट पोल के आते ही सरगर्मी इतनी बढ़ गयी कि कुछ लोगों की चेहरे की लाली चली गयी, हवाईयां उड़ गयीं कुछ लोगों को गहरा झटका लगा तो कुछ लोगों को खुशी का ठिकाना न रहा इतनी खुशी कि लड्डुओं का ऑर्डर तक दे डाला, तो कुछ ने कहा भाई अभी 10 तारीख को असली रिजल्ट तो आने दो, कभी कभी तो असली परिणाम बिल्कुल अलग निकलते हैं। अब तसल्ली तो करना ही है भैय्या, चुनाव में हर प्रकार की मेहनत भी तो बेजोड़ की गयी थी। इनमें से जो अब तक किसी की सरकार बनाते दम नहीं लेते थे उनके एग्जिट पोल देखते ही सुर बदल गए यहां तक कि उनके द्वारा अपने पसंदीदा विधायक को जिताने की भी दम कम होती दिखी, लेकिन कुछ का तो जबाव ही नहीं उनके चेहरे पर कोई फर्क नहीं, बोले, 10 तारीख को देखना ये सब एग्जिट पोल और ओपिनियन पोल ध्वस्त हो जाएंगे धरे के धरे ही रह जाएंगे जीत तो हमारी ही होगी। कहना भी सही भी है क्योंकि वह खर्च भी तो बहुत हुई। हालांकि भितरघात करने वालों के तो दिल ही अजीब होते हैं, उनकी शैली "कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना" वे दोनों पक्षों की क्रिया प्रतिक्रिया देखने के बाद अंदर ही अंदर खुश होते हैं कि कोई हारे कोई जीते अपनी तो दसों अगुलियां घी में ही रहेंगी। चर्चाओं का बाजार अभी 9 मार्च की रात तक अभी और गरम रहेगा।
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