राजमार्ग बना है छुट्टा पशुओं का आश्रय केंद्र मुख्यमंत्री के आदेश का नही हो रहा पालन

राजमार्ग बना है छुट्टा पशुओं का आश्रय केंद्र

मुख्यमंत्री के आदेश का नही हो रहा पालन

किसानों की फसल बर्बाद करने के साथ साथ सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहे घुमंतु पशु

छुट्टा पशुओं से परेशान किसान रात रातभर जगकर फसल बचाने को मजबूर
अलका आशीष 
पड़रिया तुला खीरी। क्षेत्र में निआश्रित पशुओं को लेकर सूबे के मुखिया द्वारा दिये गए आदेश का बिल्कुल भी पालन नही हो रहा है। लगातार पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। जहां दिन में यह पशु किसानों की खून पसीने से उगाई गई फसल को बर्बाद करते हैं,तो वहीं रात में राजमार्ग पर अपना डेरा डालकर निकल रहे राहगीरों को दुर्घटनाओं की दावत दे रहे हैं। इन्ही पशुओं की वजह से अनगिनत लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके है। इस समय पशुओं से फसल बचाने के लिए किसानों को भी रात रात जगकर अपनी फसल बचानी पड़ रही हैं। 
लगातार राष्ट्रीय राजमार्ग,राज्य राजमार्ग पर निआश्रित पशुओं की तदाद बढने से हो रही दुर्घटनाओं की समस्या को देखते हुए बीते दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए जिला अधिकारियों को आदेशित किया था कि जितने भी निआश्रित पशु सड़कों खेतों में घूम रहे है उन्हें तत्काल में पकड़वाकर पहले से संचालित गो आश्रय केंद्रों पर पहुंचाकर उनके चारा पानी की व्यवस्था की जाए। लेकिन अधिकारियों द्वारा विकासखण्ड बिजुआ क्षेत्र में इस आदेश का पालन होते नही दिखाई दे रहा है। शाम होते ही क्षेत्र के लखीमपुर भीरा राजमार्ग पर पड़रिया तुला,गुलरिया,बसतौली,बिजुआ, इटकुटी के चौराहों की पूरी सड़क पर सैकड़ों निआश्रित पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ देखा जा सकता है। जिससे न सिर्फ राजमार्ग पर निकलने वाले वाहनों को भारी दिक्कत होती है,बल्कि आये दिन इनसे टकराने पर लोगों को दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ रहा है। 

बीते शुक्रवार की रात लखीमपुर से वापस आते वक्त गुलरिया गांव में बिजुआ निवासी अटल शुक्ला व मनोज कुमार की कार एक गाय के बछड़े से टकराने के बाद एक कामर्सियल गाड़ी से जा भिड़ी थी। टक्कर इतनी भयंकर की थी कि गया का बछड़ा मौके पर ही खत्म हो गया था और कार सवार लोगों को गम्भीर चोटें आई थी। सूचना पर पहुंची बिजुआ पुलिस ने घायलों को बिजुआ सीएचसी भर्ती कराया जहां हालत गम्भीर देखते हुए जिला अस्पताल और जिला अस्पताल से लखनऊ के लिये घायलों को रेफर कर दिया गया है। इससे पहले भी क्षेत्र में पशुओं से टकराने से हुई दुर्घटनाओं के अनगिनत मामले हैं। वहीं क्षेत्र के किसानों को घुमंतु पशुओं से धान, गन्ने की फसल बचाने के लिए पूरी पूरी रात जगकर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है।

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