नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास, डीएनए रिपोर्ट से साबित हुआ अपराध

नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास, डीएनए रिपोर्ट से साबित हुआ अपराध


​देवनन्दन श्रीवास्तव 

लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के जनपद खीरी स्थित विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट द्वितीय) के न्यायाधीश विष्णु देव सिंह ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने अभियुक्त राजेश चौहान को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 11,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला सरकार बनाम राजेश चौहान मुकदमा अपराध संख्या 119/2024 के तहत सुनाया गया, जिसमें अभियुक्त पर थाना शारदा नगर में धारा 376(3), 506 आईपीसी तथा 5J(2)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज था।

​पूरी घटना के अनुसार, थाना शारदा नगर के ग्राम छाला ओदारा निवासी अभियुक्त राजेश चौहान पुत्र कंधई ने एक 14 वर्षीय नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया था। इस जघन्य अपराध के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई थी और बाद में उसने एक पुत्री को जन्म दिया। इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बाद से ही अभियुक्त जिला कारागार खीरी में निरुद्ध है। न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को बेहद मजबूती से प्रस्तुत किया। सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो कोर्ट) बृजेश कुमार पांडे द्वारा प्रभावी पैरवी की गई। अभियोजन ने आरोपी को सजा दिलाने के लिए न्यायालय के समक्ष 14 महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य और 7 गवाहों को परीक्षित कराया।

​इस पूरे मुकदमे में सबसे बड़ा और अकाट्य मोड़ तब आया जब अभियुक्त का डीएनए टेस्ट कराया गया और वह पीड़िता की नवजात पुत्री से पूरी तरह मैच हो गया। इस वैज्ञानिक साक्ष्य के सामने बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दी गई कोई भी दलील या सफाई टिक नहीं सकी और अभियुक्त खुद को निर्दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। दोनों पक्षों की दलीलों और पुख्ता सबूतों को देखने के बाद न्यायालय ने अपराध की गंभीरता और पीड़िता की मानसिक व शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त राजेश चौहान को दोषी पाया और उसे 20 साल की सख्त कैद और जुर्माने की सजा से दंडित किया।

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