तीज के रंग, संस्कृति के संग, भारत विकास परिषद संस्कृति शाखा में सजी मातृशक्ति की अनुपम छटा
देवनन्दन श्रीवास्तव
लखीमपुर-खीरी। सावन की रिमझिम फुहारों, तीज के पारंपरिक उल्लास और भारतीय संस्कृति की सुगंध से सजी संध्या में भारत विकास परिषद, नैमिष प्रान्त की संस्कृति शाखा, लखीमपुर खीरी का तीजोत्सव मातृशक्ति की प्रतिभा, संस्कार और सृजनशीलता का अनुपम उत्सव बना। गीत-संगीत, काव्य, नृत्य और विविध प्रतियोगिताओं के रंगों ने वातावरण को ऐसा जीवंत किया कि मानो सावन स्वयं उत्सव बनकर आंगन में उतर आया हो।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद एवं भारत माता के चित्रों पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। इस अवसर पर भारतीय संस्कृति, नारी शक्ति, संस्कार और सामाजिक समरसता के संदेश ने पूरे आयोजन को गरिमा प्रदान की। उक्त कार्यक्रम महिला संयोजिका मंजू सक्सेना व कोषाध्यक्ष राधा मिश्रा के कुशल निर्देशन व डॉ०सुशीला सिंह के प्रभावी संचालन में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही तीज क्वीन प्रतियोगिता, जो तीन चरणों में आयोजित हुई। प्रतिभागियों ने पारंपरिक वेशभूषा, श्रृंगार, प्रतिभा और प्रभावी संवाद के माध्यम से अपनी सृजनात्मकता का परिचय दिया। त्वरित प्रश्नोत्तरी ने प्रतियोगिता में रोमांच और उत्सुकता का रंग भर दिया। शानदार प्रदर्शन के आधार पर शालिनी जायसवाल के सिर तीज क्वीन का ताज सजा। राधा मिश्रा प्रथम उपविजेता तथा सुनीता शुक्ला द्वितीय उपविजेता रहीं। विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इसके बाद तीज गीतों की मधुर स्वर-लहरियों ने सावन की पुरानी स्मृतियों को जीवंत कर दिया। पूर्णिमा इंद्र के काव्य पाठ और ज्योति सिंह के प्रभावी वक्तव्य ने कार्यक्रम में साहित्यिक एवं वैचारिक रंग भरा। वहीं श्यामजी शेखर, रंजना गुप्ता, मंजू सक्सेना, पुष्पांजलि, निधि गोयल, सुनीता शुक्ला एवं विमला गुप्ता की सुरमयी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सचिव राजशेखर तथा निवर्तमान अध्यक्ष एडवोकेट आर्येन्द्र पाल सिंह ने भी गायन में अपने हाथ आजमा कर समां बांधा। इस अवसर पर शाखा के संस्थापक एवं निवर्तमान अध्यक्ष एडवोकेट आर्येन्द्र पाल सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति की वास्तविक शक्ति उसकी परंपराओं, संस्कारों और परिवार व समाज को जोड़ने वाली आत्मीय भावनाओं में निहित है। उन्होंने मातृशक्ति का आह्वान किया कि वे संस्कृति, संस्कार और सेवा की इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहें। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावी संचालन व संयोजन डॉ० सुशीला सिंह के द्वारा किया गया। पूरे आयोजन में तीज के रंगों के साथ नारी प्रतिभा, आत्मविश्वास, कला और सामाजिक एकता की ऐसी सुंदर छटा देखने को मिली, जिसने यह संदेश दिया कि परंपराएं केवल अतीत की स्मृतियां नहीं, बल्कि वर्तमान को संस्कार और भविष्य को दिशा देने वाली जीवंत धरोहर हैं। सावन की इस सांस्कृतिक संध्या ने उपस्थित मातृशक्ति के चेहरों पर मुस्कान और मन में अपनत्व के भाव भर दिए। तीजोत्सव वास्तव में संस्कृति, सौंदर्य, सृजन और सामाजिक समरसता का ऐसा भावपूर्ण संगम बन गया, जिसकी स्मृतियां लंबे समय तक मन में हरियाली की तरह जीवित रहेंगी।
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